एक अलग ही मोहब्बत - by Prachi Mittal
एक अलग ही मोहब्बत
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एक अलग ही मोहब्बत यह करते हैं,
ये मातृभूमि की वीर इस धरती पर मरते हैं।
हौसला बुलंद दिलों में जज्बात,
वतन हीं प्यार, वतन ही ख्वाब ये रखते हैं।
कई गोलियां खाकर, पूरा छलनी होकर भी ,
चट्टान की तरह सरहद पर अड़े रहते हैं।
यह ऐसे वीर माँ के वीर सपूत है जो,
मर जाएँ पर दुश्मन के आगे ना झुकते हैं।
एक अलग ही मजहब ये रखते हैं,
जाति-पाती ना देख बस देश की रक्षा करते हैं।
सलाम है देश के इन सपूतों को, इन रखवालों को,
जो सिर्फ इस वतन से ही प्यार करते हैं।
एक अलग ही शहादत से ये धरती पर मरते हैं,
जो हम तुम सोच भी कहाँ सकते हैं।
- प्राची मित्तल
भरतपुर, राजस्थान


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