सैनिक हैं हम भारत के - by Akshai Kumar Saxena
सैनिक हैं हम भारत के
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जन्म लिया जब इस धरती पर,
थी मुठ्ठी बन्द और रहस्य अंजान।
खेल-कूद कर इस माटी में,
शरीर बना अपना बलवान।
बढ़ती उम्र, ज्ञान के बढ़ते,
स्वाभिमान भी ख़ूब बढ़ा।
धीरे-धीरे माँ धरती से,
मेरा प्यार भी ख़ूब बढ़ा।
अनेक समस्याओं से घिरा,
माँ का यह लाल भी था।
पढ़ा - लिखा भरपूर,
फिर भी था मजबूर।
यौवन से हो उत्साहित,
सोचा मैंने एक दिवस यह खूब।
फेरे लेकर,'फेर' में पड़ू
या बन जाऊँ एक फूल।
समय ने ली करवट और बदल गए मिजाज
संकट में था देश, बढ़ रहा था क्लेश
पड़ोसी ही बने शत्रु, फुफकारने लगे साँप।
देख यह सब, चुप रह न सका मैं!
खून में उबाल था, माँ भारती से प्यार था।
सैन्य धर्म की पुकार, कैसे मैं न मानता?
हर कदम पर शत्रु था, क्यों न मैं उन्हें मारता?
वीरता के भाव थे,
शत्रु भी अपार थे।
सैन्य दल के तीखे प्रहार से
शत्रु बेहाल थे।
तनिक पीछे हटना मंजूर नहीं
निडर खड़े, गोली सीने पर खाते थे
सीना छलनी होने पर भी,
वो लड़ते ही जाते थे।
"माँ भारती" के वंशज हैं हम !
वीर सैनिक कहलाते हैं।
संकट में जब "माँ" होगी..
जीवन दे कर फर्ज निभाएँगे।
शीश अपने को फूल बना कर,
हँसते - हँसते मातृभूमि पर चढ़ाएँगे।
- अक्षय कुमार सक्सेना
शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश


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