तिरंगा फहरा देना - by Prem Kumar Tripathi 'Prem'
तिरंगा फहरा देना
कोरी इच्छा मत करना कि नाम छपे अखबारों में ।
लिखा सको तो नाम लिखा लो अपना चौकीदारों में ।।
सीमा पर जो खड़े सिपाही उनका मान बढ़ा देना।
अगर ज़रूरत पड़ जाए तो अपना लहू बहा देना।।
लाल देश का खो जाए तो गौरव गान सुना देना।
देश बड़ा अपनी माता से यह फरमान सुना देना।।
वीर शहीदों की यादों में अपना शीश झुका देना।
दर्शन मिल जाए इनका तो माला फूल चढ़ा देना।।
आज़ादी के दीवाने जो कफ़न बाँधकर निकले थे।
भारत माता की रक्षा में , नाग फनों को कुचले थे।।
ऐसे सोए जाँबाज़ों के पास तिरंगा फहरा देना।
साथ हमेशा खड़े आप हैं, यह एहसास करा देना।।
- प्रेम कुमार त्रिपाठी 'प्रेम'
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
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