वीर सपूत - by Mamta Richhariya


वीर सपूत

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देश सेवा में डटे रहें जो गौरव हिंदुस्तान का।

सीमा पर रखवाली करता भारत के सम्मान का।।


छोडा़ अपना घर और द्वार करता नाम गाँव का।

मस्तक ऊँचा किया पिता का मान बढा़या मात का।।


चौडा़ सीना करके चलता बना काल हलकान का।

एक अकेला लडा़ बीस से होंसला देखो बलवान का।।


भारत माँ की आन की खातिर पाठ पढा़ बलिदान का।

शीष कटा दिऐ हार न मानी पाठ सिखाया स्वाभिमान का।।


फौजी के ही त्याग की खातिर स्वागत होता त्योहार का।

राखी, दीवाली, ईद, दशहरा रंग बिखरता गुलाल का ।।


जय हो जवान जय हो जवान स्वागत हो वीर महान का।

आसमान में गूँज रहा हो स्वर वीरता के गान का।।


हाथों में बंदूक ले चले संकल्प केसरिया परिधान का।

देशप्रेम की ज्वाला मन में ख़याल देश की शान का।।


केसर की क्यारी को सींचा रखा मान हिमवान का।

ममता का कुछ कर्ज चुकाया रखा मान स्तनपान का।।


आओ करे गुणगान देश के वीर सपूत जवान का।

आदर और सत्कार मिलें और हो सम्मान परिवार का ।


- ममता रिछारिया

टिमरनी,मध्य प्रदेश

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