फौजी का खत - by Rajesh Shrivastava


फौजी का खत


गुलाबी   मन    के   मौसम   में,
मखमली सर्दी आई है।
फ़र्जेवतन     के     मौसम    में,
ज़हन  पे वर्दी छाई है।।

बिस्तर     की      सिलबटों    में,
कुछ  नींद  पड़े  होंगे।
कपड़े    टांगने    की    खूँटी   में,
कुछ ख्वाब टंगे होंगे।।

और    तुम्हारी    अंगराइयों    के,
नजारे   भी  भेज  देना।
गले   हम    जब  जब    लगे   थे,
वो पल भी सहेज लेना।।

गुस्से  से   तुम्हारा   लाल   चेहरा,
सुबह की धूप से पा लूँ।
तेरे  बदन  की  भीनी  खुशबु  से,
सोचता हूँ रोज नहा लूँ।।

सरहद के  इस पार  या  उस पार,
हर एक किस्सा अनूठा है।
सरहद   का   ज़मीनी    सच    है,
बीबी का इंतजार झूठा है।।

दोनों  सरहदें  प्यासी है  खून की,
आँखों को छुट्टी की आस।
नफरत पलती बेवजह जुनून की,
दिलों में प्यार की  तलाश।।


- राजेश श्रीवास्तव

बेंगलुरु, कर्नाटक

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