शहादत - by Sandhya Tiwari
शहादत
आओ नमन हम करें आज उनको,
हँस के दी जिसने शहादत वतन को।
फिकर और ना डर था बस हौंसला था,
वतन ही वतन पूरे मन में बसा था।
ऊर्जा से तन उनका पूरा भरा था,
जब सामने शत्रु का दल खड़ा था।
आओ नमन हम करें आज उनको,
हँस के दी जिसने शहादत वतन को।
लड़ते रहे जब तक बाहों में दम था,
आंखों में शोला कफ़न सर बंधा था।
डटकर किया सामना दुश्मनों का,
माथे तिलक धरती माँ का लगा था।
आओ नमन हम करें आज उनको,
हँस के दी जिसने शहादत वतन को।
मेरा वतन मुझको जान से है प्यारा,
उनकी जुबां पर यही था बस नारा।
लहरा तिरंगा फर्ज़ अपना निभाया,
अंतिम में खुद को तिरंगे में पाया।
आओ नमन हम करें आज उनको,
हँस के दी जिसने शहादत वतन को।


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