आषाढ़ उमस और बारिश - Gudiya Kumari


आषाढ़ उमस और बारिश 

-

हाय-हाय आषाढ़ी उमस की गर्मी,

कुछ तो करो हम सब पर नर्मी।

और बारिश क्यों बन गए अधर्मी?

उफ उमस!

हवा चली, आँधी और तूफान भी आए,

बादल ने भी गर्जना दिखाई।

फिर भी बारिश की फुहार न आई,

अब तक आँगन की काई भी न हरियाई।

बेहयाई आषाढ़ी उमस भरी गर्मी

उफ! 

किसान भी तिलमिलाए हैं, 

उनका जीवन क्यों

मिट्टी में मिलाए है! 

छत पर टहलती तुझे

तकती रही बादल

तू आए और जाए है।

आँधी-तूफान की आँख मिचौली खूब खेले है

आस लगाए बैठी हूँ।

बारिश की बूँदों की बहार आ जाए,

मैं खूब भींगूँ और

तुझ पर प्यार आ जाए,

बारिश की बूँदों की बहार आ जाए।

दादूर की आवाज आए

कोयल की कूक और

तलैया में बाढ़ आ जाए।

बारिश के बूँदों की फुहार आ जाए,

और घर के आँगन में खुशियाँ छा जाए।

 

- गुड़िया कुमारी

गया, बिहार

No comments

Powered by Blogger.