मिट्टी का दीया - by Anita Singh


मिट्टी का दीया

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मिट्टी से बना दीया,

मिट्टी मैं ही एक दिन मिल जाता है।

अपने जीवन काल में,

निस्वार्थ भाव से,

लोगों के काम आता है।


मिट्टी को सुंदर रूप देकर,

कुम्हार अपनी कला को दर्शाता है।

आग की भट्टी में तपाता है,

लोगों को बेच देता है।


मंदिरों में पूजा पाठ में,

मांगलिक कार्यों में,

तीज त्योहार में,

दीया जलाकर,

शुभारंभ करते हैं।


राजा महाराजा के,

महलों से लेकर,

निर्धन लोगों की झोपड़ी तक में,

तेल बाती के साथ,

अपने आप को जलाकर,

अपनी रोशनी से,

दिवाली मनवाता है।


एक दिन उसको बेकार समझ,

कचरे में डाल देते हैं।

मिट्टी से बना,

मिट्टी में ही मिल जाता है।


- अनीता सिंह

जयपुर, राजस्थान

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