आजादी की अमृत बेला - by Anil Ojha
आजादी की अमृत बेला
-
जिन वीरों की कुर्बानी से
हमने आज़ादी पाई।
श्रद्धापूर्वक नमन करें हम
अमृत बेला है आई।
लाल कई भारत माता के,
हँसकर फाँसी पर झूले।
उन वीरों की कुर्बानी को,
कृतज्ञ राष्ट्र कैसे भूले।।
ये स्वतंत्रता की बयार,
उनकी कुर्बानी थी लाई।
श्रद्धापूर्वक नमन करें हम,
अमृत बेला है आई ।।
कितना जोश जुनून था उनका,
माथे बाँधा स्वयं कफन।
था संकल्प सभी के मन में,
गौरी सत्ता करें दफन।।
ऐसी दीवानगी भारत के,
युवकों में तब थी छाई।
श्रद्धापूर्वक नमन करें हम,
अमृत बेला है आई ।।
भारत माँ को मुक्त कराने,
सड़कों पर उतरे गाँधी।
काँप उठी अंग्रेजी सत्ता,
देखी जो जनता आँधी।।
सत्य-अहिंसा की राहें तब,
बापू ने थी अपनाई।
श्रद्धापूर्वक नमन करें हम,
अमृत बेल है आई।।
मुक्त गगन में नित्य तिरंगा,
आज सभी फहराते हैं।
झंडा ऊँचा रहे हमारा,
गीत प्रेम से गाते हैं।।
शान रहे कायम झंडे की,
हमने भी कसमें खाई।
श्रद्धा पूर्वक नमन करें हम,
अमृत बेला है आई।।
- अनिल ओझा
इंदौर, मध्य प्रदेश
No comments