छोटा-सा जीवन - by Rekha Chamoli
छोटा-सा जीवन
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छोटा-सा है ये जीवन,
कभी खुद के मन की भी कर लेना दोस्तों
बेवजह हँसना कभी तो,
कभी मन भर आँखू में आँसू भर लेना।
मत सोचना कोई कहेगा उम्र हो गए तेरी,
भीग जाना बारिश की बूँदों में
कुछ पल ही सही,
अपना बचपन फिर से जी लेना दोस्तों।
भागते मत रहना जीवन भर,
थोड़ा कभी ठहर भी जाना
कभी बेवजह किसी अपने से,
यूँ ही मिल आना दोस्तों।
ऊँची मेरे घर की छत है,
छोटा-सा है उसका घर,
इस बात पर मत इतराना
प्रेम, श्रद्धा से जो पुकारे,
कृष्ण सुदामा जैसा बन जाना दोस्तों।
बहुत आए बहुत गए,
किसी का न हुआ यह संसार
पर रहें या न रहें,
याद करके तुमको
मुस्कराहट चेहरों पर बिखर जाए
कुछ लम्हें इस तरह से जी लेना दोस्तों।
- रेखा चमोली
श्रीनगर, उत्तराखंड
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