ये जिंदगी - by Vijay Purohit
ये जिंदगी
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जज़्बे और हौंसलो को ये खबर करते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफर है,चलते रहो।।
हर मोड़ पर यह जिंदगी इम़्तिहान लेती है।
अपनो में छुपे ग़ैरों को भी पहचान लेती है।।
सोच के रखो कदम,जीवन बसर करते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफर है,चलते रहो।।
कुछ पाने के लिऐ भी कुछ खोना पड़ता है।
मुस्कुराहट पाने के लिए हमें रोना पड़ता है।।
हर लम्ह़ा खुशियाँ ही दे,वो हून्नर भरते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफ़र है,चलते रहो।।
जिंदगी ये हमारी बस सिर्फ़ पल दो पल है।
जिसमें ना ही तो आज और ना ही कल है।।
हर पल को हसीन और बेहतर करते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफ़र है,चलते रहो।।
गुलाब-सा बन कर जिंदगी भर मुस्कुराईए।
हार कर भी हर एक गम़ को भूल जाईए।।
हर गम़ और हर हार को बेअसर करते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफ़र है,चलते रहो।।
जिंदगी को जीने का कुछ नया अंदाज दो।
नहीं दिखे राह,अपने दिल को आवाज दो।।
राहे कठिन है"विजय"मगर डगर भरते रहो।
ये जिंदगी मंजिल नहीं,सफ़र है,चलते रहो।।
- विजय पुरोहित
रामगढ़, राजस्थान
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