एक शाम मेरे नाम - by Sneha Chauhan


एक शाम मेरे नाम

 -

एक शाम मेरे नाम होती।

हम होते, तुम होते और

प्यार में शाम की लाली होती।


एक शाम मेरे नाम होती

चाय की चुस्कियाँ, अनकही बातें होती।

हमारे दर्मिया, न कोई दूरी होती।


एक शाम मेरे नाम होती।

बरसों के बाद सही, एक मुलाकात होती।

चाँद न सही ढलते सूरज की शाम होती।


एक शाम मेरे नाम होती।

ये ख्वाब कहीं हकीकत होती।

नजरों की हर बात, खुली किताब होती।


एक शाम मेरे नाम होती।

हर राज खोलती तुमसे,

खामोश निगाह बोलती।

जिंदगी की हर शाम साथ होती।


एक शाम मेरे नाम होती।

कान्हा के संग जैसे राधा होती,

प्रेम भरी जो एक शाम होती।

दुनिया के प्रेम ग्रन्थ में,

हमारा भी नाम होता।

एक शाम मेरे नाम होती।


 - स्नेहा चौहान

 दमोह, मध्य प्रदेश

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