हाँ ! मैं वही हूँ - by Somdutt Sharma Ashri
हाँ ! मैं वही हूँ
-
ओ मेरे गुजरे वर्षों के लम्हों
लौट आओ, लौट आओ।
मैं वही हूँ, मैं वही हूँ,
हाँ ! मैं वही हूँ।
आते - जाते राहों पे
दीदार उसका होता था।
जिस भी दिन न दिखे
उस दिन दिल रोता था।
दिल चीख-चीखकर कहता
मैं शतप्रतिशत सही हूँ।
हाँ ! मैं वही हूँ।
वो खिलते कमल की
पंखुड़ियों जैसे कोमल नयन।
झट से आकर बोले
मुझे वो मीठे-मीठे बयन।
वो तपते दुग्ध - सी
मैं ठण्डी ठण्डी दही हूँ।
हाँ ! मैं वही हूँ।
हठखेलियाँ करती वो
जैसे हिरण की बच्ची।
सूरत तो साफ है ही
दिल की भी वो सच्ची।
लोगों के लिए पागल हूँ
पर तेरे लिए तो कवि हूँ।
हाँ ! मैं वही हूँ।
- सोमदत्त शर्मा आसरी
कुरुक्षेत्र, हरियाणा
No comments