फिर से होना चाहिए - by Moorat Singh Yadav


फिर से होना चाहिए

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फिर से होना चाहिए, देश पक्ष में काम।

नेता भरते पेट को, करते अपना नाम।।


महँगाई के तोड़ में, देश बना बेकार।

फिर से होना चाहिए, सबके एक विचार।।


जाति-धर्म में बट रहे, जे भारत के लोग।

फिर से होना चाहिए, सत् संगति के योग।।


धनबल बाहुबल बना, अब नर की पहचान।

फिर से होना चाहिए, इन बातों पर ज्ञान।।


फिर से होना चाहिए, भगवान का अवतार।

पापी कामी बड़ गये, फैला पापा चार।।


फिर से होना चाहिए, रोजगार की बात।

धीरे-धीरे हो गए, बड़े बुरे हालात।।


धीरे-धीरे हो गए, अब एकल परिवार।

फिर से होना चाहिए, सामंजस व प्यार।।


वृक्षारोपण सब करें, रक्षण करे न कोय।

फिर से होना चाहिए, रक्षण रोपण दोय।।


फिर से होना चाहिए, वायुमंडल साफ।

तभी मिल सके मनुज को, एक सच्चा इंसाफ।।


फिर से होना चाहिए, सत्य धर्म आधार।

तब जाकर होगा सही, मानव का उद्घार।।


संस्कार नर में नहीं, वे नर ढ़ोर समान।

फिर से होना चाहिए, संस्कार का ज्ञान।।


बिन तरुवर न साँस है, साँस बड़ी अनमोल।

फिर से होना चाहिए, पेड़ लगें दिल खोल।।


फिर से होना चाहिए, भारत उदय प्रकाश।

पेड़ काट नर कर रहे, जीवन अपना नाश।।


फिर से होना चाहिए, सत्य धर्म की जीत।

एक दूजे के हों सभी, बुरे वक्त में मीत।।


फिर से होना चाहिए, जनसंख्या कानून।

दिन दिन जनता बढ़ रही, सब देशों की दून।।


- मूरत सिंह यादव

दतिया, मध्य प्रदेश

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