उपहार है बेटी - by Binod Begana


उपहार है बेटी

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सकल सृष्टि का सुंदर इक उपहार है बेटी।

रौनक है घर-घर की, औ' श्रृंगार है बेटी।

है बेटी तो खानदान की, बढ़ती है कड़ियाँ,

है बेटी तो घर-आँगन में, बजती है चूड़ियाँ,

काजल बिन्दी और गजरे की, हार है बेटी।

मम्मी की सहेली पापा की, पुचकार है बेटी।

बेटी आँगन की तुलसी, पूजा की कलशी है,

बेटी है तो नाच-गान और, हँसी-खुशी भी है,

स्नेह ममता की खान, दया का द्वार है बेटी।

हिम्मत हौसला, शक्ति का भंडार है बेटी।

बेटी है तो भैया दूज और, रक्षाबंधन है,

बेटी है तो घर- आँगन की, मिट्टी चंदन है,

हर परिवार की इज्ज़त औ संस्कार है बेटी।

लाड-प्यार, धन-दौलत की हकदार है बेटी।

बेटी है तो चौबारों पर कथा-कहानी है,

बेटी है तो आगे चलकर दादी-नानी है,

कर्तव्यों के पथ पर इक अधिकार है बेटी।

सृजन-शक्ति के संग-संग ही संहार है बेटी।

सकल सृष्टि का सुंदर इक उपहार है बेटी।


- बिनोद बेगाना

जमशेदपुर, झारखंड

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