गुरु को प्रणाम - by Dr. Rajesh Kumar


गुरु को प्रणाम

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स्वागत स्वागत स्वागत स्वागत, स्वागत करने हम आए हैं,

धन तो मेरे पास नहीं फूलों की माला लाए हैं।

इसको गुरु स्वीकार करो आशीर्वाद मुझ को देना,

दिया बहुत ज्ञान आपने एक कृपा और कर देना।


मर सकूँ देश के हित में यह क्षमता मुझको देना,

देकर प्रकाश गुरुवर आपने अंधकार से बचा लिया।

स्वागत स्वागत स्वागत स्वागत, स्वागत करने हम आए हैं,

धन तो मेरे पास नहीं फूलों की माला लाए हैं।


तुमको कोटी प्रणाम गुरुवर तुम को कोटी प्रणाम,

करती नमन धारा तुमको बादल भी झुक जाए।

 खड़ा हिमालय भी सम्मुख प्रभु आ कर झुक जाए,

 पूरी दुनियाँ तो यहाँ तुम्हारे ही गुण गाए।


स्वागत स्वागत स्वागत स्वागत, स्वागत करने हम आए हैं, 

धन तो मेरे पास नहीं फूलों की माला लाए हैं।

सब अपनी-अपनी बोली में, सब अपनी ही हमजोली में

करते तुम्हारा गुणगान गुरुवर तुमको कोटी प्रणाम।


स्वागत स्वागत स्वागत स्वागत, स्वागत करने हम आए हैं,

धन तो मेरे पास नहीं फूलों की माला लाए हैं।

कैसे गुरु से तर पाऊँगा, मैं सोच रहा हूँ खड़ा आज,

मन उछल उछल कर कहता है पहना दूँ तुमको स्वर्णमाला।


मुझको दो आशीर्वाद जिससे मैं कुछ कर पाऊँ,

चलकर पद चिन्हों पर आपके अपने जीवन को धन्य बनाऊँ।

जरूरत हो इस दुनिया को तो अपना सर कटवा दूँ,

 पर हित में मरने की शक्ति दे बसंती आभा बिखरा दो।

स्वागत स्वागत स्वागत स्वागत, स्वागत करने हम आए हैं,

धन तो मेरे पास नहीं फूलों की माला लाए हैं।


- डॉ० राजेश कुमार

कानपुर, उत्तर प्रदेश

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