मेरे प्रियवर - by Sony Choudhary


मेरे प्रियवर

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मन में तुम, धड़कन में तुम,

शोणित के कण-कण में तुम,

अधरो की मुस्कान में तुम,

 जीवन के सम्मान में तुम,

कैसे तुझे भुलाऊँ प्रियवर,

क़ैसे तुझे बिसारुँ मैं।


सुनसान डरावनी राहों में,

जीवन के घनी अंधियारों में,

तेरे प्रेम का दीपक लेकर,

जग का तिमिर मिटाऊँ मैं,

 कैसे तुझे भुलाऊँ प्रियवर,

क़ैसे तुझे बिसारुँ मैं।


यादों की तपन,

आहों की जलन,

हृदय के स्पंदन में तुम हो।

शब्दों में तुम, रागों में तुम,

मन मंदिर के पूजन में तुम,

कैसे तुझे भुलाऊँ प्रियवर,

क़ैसे तुझे बिसारुँ मैं।


मेरी वीणा के तारों में तुम,

अनंत तक सितारों में तुम,

मेरे जीवन, मेरे आराध्य,

तुम बिन चैन कहाँ मैं पाऊँ,

कैसे तुझे भुलाऊँ प्रियवर,

क़ैसे तुझे बिसारुँ मैं।।


- सोनी चौधरी

नई दिल्ली

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