जीवन की सच्चाई - by Shikha Saxena



जीवन की सच्चाई

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यहाँ मंजर बदल जाते हैं एक क्षण में,

समंदर मचल जाते हैं एक क्षण में ।

अपने भी बदल जाते हैं एक क्षण में,

पराए अपने बन जाते हैं एक क्षण में ।।


सुंदर शरीर ढल जाता है एक क्षण में,

धुंधली हो जाती हैं तस्वीरें एक क्षण में ।

सदियाँ भी गुजर जाती हैं एक क्षण में,

यादें भी मिट जाती हैं एक क्षण में ।।


साँसें भी रुक जाती हैं एक क्षण में,

जीवन समाप्त हो जाता है एक क्षण में ।

वक्त का पहिया घूम जाता है एक क्षण में,

सपने बिखर जाते हैं एक क्षण में ।।


फिर भी ए मुसाफिर ! तू बढ़ता चल,

सपनों की राह पर तू चलता चल ।

तुझमें है कुछ बात ये कहता चल,

मन में रख विश्वास और हँसता चल ।।


जिंदगी अदाएँ दिखाएगी तुझे,

कभी हँसाएगी और कभी रुलाएगी तुझे ।

काँटों से भरी राह भी दिखाएगी तुझे,

खुद को सँभालना भी सीखाएगी तुझे ।।


प्यार से गले भी लगाएगी तुझे,

प्रकृति-सा कभी सजाएगी भी तुझे ।

बारिश की बूँदों-सा भिगाएगी तुझे,

अंत में अपने साथ भी ले जाएगी तुझे ।।


- शिखा सक्सेना

नई दिल्ली

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