जरूरी है - by Shraddha Parihar


जरूरी है

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ठहराव जरूरी है, हर बार जरूरी है,

ज़िंदगी में हर परिस्थिति में एक, 

नया प्रयास जरूरी है, समस्या कितनी भी हो अपनी,

फिर भी एक नवांगतुक को लेकर एक,

मुस्कुराहट जरुरी है, रिश्तों के मोल को देखें,

पैसो से ज्यादा रिश्तों की बौछार जरूरी है,

होता वही जो तय किया राम ने,

फिर भी हर बात पर क्या,

तरी पलटवार जरुरी है, रिश्तों को पहचाने,

कड़वी बातों को भूलकर, मीठी बातों को अपनाएँ,

गुजरी हुई बातों को क्या इस तरह पकड़ना जरूरी है।

रत की तरह जाने ना दें समय को,

क्या इसे बर्बाद करना जरुरी है।

गुजरा हुआ वक़्त ना तेरा होगा फिर,

क्यों हर गुजरे वक़्त को याद करना जरूरी है।

सुखद पलों को सहेजे रिश्तों को पहचाने,

इनको छोड़ क्या हर बात पर दुश्मनी जरूरी है।

बन ऐसी मिसाल तू जो रिश्ते के मोती को पहचाने,

बातों बातों में क्या तेरा मेरा करना जरूरी है।

हर बात अगर सीधी होती तो जिंदगी क्यों कठिन लगती,

इतने पर भी हर तेरी बात करना क्या जरूरी है।

हँसते-हँसते जिंदगी कांटे यह सोचते हैं ना,

फिर हर कमी पर रोना क्या जरूरी है।

जो है जितना उसमें तसल्ली हो,

फिर भी हर ललक को पूरा करना क्या जरूरी है।

आओ मिलें, मिली जिंदगी को सवारे,

दूसरों की जिंदगी में ताँक-झाँक क्या जरूरी है।

मिले सब से आओ प्यार बाँटे प्यार पाए,

नफरत की दीवार बढ़ाना क्या जरूरी है।


- श्रद्धा परिहार

रायपुर, छत्तीसगढ़

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