झूठे लोग - by Dr. Meetu Sinha


झूठे लोग

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झूठे लोग खोते विश्वास,

खाते धोखे स्वयं सदा।

कोई क्या करें इनका,

धोखा देती जिनकी अदा।


यह सच भी बोले तो,

झूठ ही लगता है सबको।

सच कहूँ तो झूठे लोग,

अच्छे नहीं लगते थे हमको।

सच्चाई तब पता चली,

जब झूठ हमें कहना पड़ा।।

झूठे लोग खोते विश्वास,

खाते धोखे स्वयं सदा।।


वह भी झूठे ही हैं जो,

दुख को अपने छुपाते हैं।

वह भी झूठे ही हैं जो,

दुखित हृदय से मुस्काते हैं।

पर निश्चय ही है इनका,

अंतः हृदय काफी बड़ा।।

झूठे लोग खोते विश्वास,

खाते धोखे स्वयं सदा।।


ऐसे भी झूठे लोग यहाँ हैं,

जो खुद भूखे रह जाते हैं।

अपने हिस्से का भोजन,

दूसरों को कराते हैं।

ऐसे झूठों के कारण ही,

जग में जग-व्यवहार चला।।

झूठे लोग खोते विश्वास,

खाते धोखे स्वयं सदा।।


ऐसे झूठे लोगों की जग में,

होती जय जयकार नहीं।

क्योंकि इन्हें कदाचित,

प्रसिद्धि से अपनी प्यार नहीं।

जो भी पुण्य कर्म किया,

कभी मुख से नहीं कहा।

झूठे लोग खोते विश्वास,

खाते धोखे स्वयं सदा।।


- डाॅ० मीतू सिन्हा

धनबाद, झारखंड

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