ना मैं हूँ गुलाम किसी का - Satyendra Pandey "Shilp"
ना मैं हूँ गुलाम किसी का
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ना मैं हूँ गुलाम किसी का,
ना किंचित रास गुलामी है।
मन भी भगवा, तन भी भगवा,
मेरा चोला रामनामी है।
चुप हूँ तो चुप ही रहने दो,
बोलूँगा तो सुनामी है।
ना सोना ना चांदी लूँगा,
मैं तो बस आजादी लूँगा।
यह प्रण मेरा अविरामी है।
ना मैं हूँ......
ना डर है ना है कोई भय,
अन्तिम शब्द जो होगे मेरे,
बोलूँगा भारतमाता की जय।
जो मैं देश के काम ना आऊँ,
बेकार मेरी ये जिंदगानी है।
ना मैं हूँ......
नहीं चाहिए धन और दौलत ,
ना ही हीरे मोती।
अंतिम इच्छा है बस इतनी,
जब निकले तन से प्राण मेरे,
हो भारत माँ की गोदी,
बस इतनी मेरी कहानी है।
ना मैं हूँ......
- सत्येंद्र पाण्डेय 'शिल्प'
गोंडा, उत्तर प्रदेश
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