जिंदगी से प्यार कर - by Seema Garg Manjri
जिंदगी से प्यार कर
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गुजर रहा है आज जो, इसको तू सँवार ले,
जिंदगी से प्यार कर, प्रीत को निखार ले।
मौन सहो दुख के पल, राम दिल में याद रहे,
बीत जाएँगी ये घड़ियाँ, सुख की तलाश रहे।
राम नाम प्रेम की, उर देवालय ज्योति जले,
संघर्ष की रात ढली, तब नवल प्रभात मिले।
ढो रहे हो बोझ क्यूँ, सेवा कर्म सुधार लें,
जिंदगी से प्यार कर, प्रीत को निखार लें।
रूठे हैं आज अपने, याद कर हम मना ले,
अहंकार त्यागकर, रिश्तों की दरार पाट ले।
अपनों से प्यार कर, कहना आज मान ले,
जन्मों के हैं बंधन, गुलकंद-सी मिठास दे।
करते क्यूँ झूठ गुमान, शीश चरण में धरें,
जिंदगी से प्यार कर, प्रीत को निखार लें।
परहित की सेवा साध, ईश्वर भी प्रसन्न रहें,
हो शुचि हृदय में, बल बुद्धि यश विद्या बढ़े।
हो आत्म ज्ञान तभी, सुख सौभाग्य मंगल भरें,
सुख शांति का खजाना, मिल के अब बाँट ले।
खो रहे भौतिकता में, अन्तस अब निहार लें,
जिंदगी से प्यार कर, प्रीत को निखार लें।
- सीमा गर्ग मंजरी
मेरठ कैंट, उत्तर प्रदेश
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