माँ और ममता - by Chhaganlal Mutha
माँ और ममता
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माँ की ममता का नहीं पार, उसी ने दिया जीवन संवार।
माँ के आशीर्वाद से ही होगा, सबके जीवन का उद्धार।
माँ ने अपना दूध पिलाया, हम को जग में जीना सीखाया।
रात रात भर जाग जागकर, लोरी गाकर हमें सुलाया।
खुद गीली चादर पर सोई, हमको सूखे में सुलाया।
खुद भूखे रहकर उसी ने, हमें पेट भर के खिलाया।
उसकी खुशी हमारी खुशी, दुःख में हमारे रोई थी वो।
नहीं कभी उसे दुखी करना, हमारा ही हैं भरोसा जो।
माँ है गंगा, माँ जमुना है, माँ हैं सारी नदियों की धार।
सारी पृथ्वी का सिचन करती, माँ की ममता अपार।
धरती माँ भी हमें सदा देती है, धन धान्य, पेड़ों की बहार।
पेड़ों से ही ऑक्सीजन बनती, जिससे जिंदा सारा संसार।
माँ महालक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ अंबे जग में तारणहार।
जिनकी कृपा और दया दृष्टि से हो जाता सबका उद्धार।
दूध दही और घी से शरीर में होता है शक्ति का संचार।
गौ माता के गोबर मुत्र से होता कई रोगों का उपचार।
मातृभूमि हमारी भारतमाता को नमन करू मैं बारम्बार।
दिलों जान से भी प्यारा वतन हमारा, वंदन करे हजार।
सब माता की लेकर आशिष, अपने जन्म को लेना संवार।
माँ के आशीर्वाद से ही होगा 'मुथा' जीवन का उद्धार।
- छगनलाल मुथा
एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया
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