महामारी और सीख - by Chetna Mahale Mishra
महामारी और सीख
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इस महामारी ने जिंदगी का
सबक सिखा दिया,
हमें अपने और अपनों के लिए
जीना सिखा दिया।
जब व्यस्त थे हम
जिंदगी की दौड़ में,
इसने तो हमें थोड़ा
रुकना सिखा दिया।
भूल चुके थे
हम खुद को,
इसने तो हमें
खुद से मिला दिया।
आज कई दिन के बाद
सुनी चिड़ियों की चहचहाहट,
आज पता चला सुबह और
शाम का होना क्या होता है।
आज कई दिन के बाद अपने हाथों से,
बने खाने का स्वाद चखा।
इसने तो मेरे अंदर,
खानसामा जगा दिया।
प्रकृति भी अजीब
खेल खेलती है।
बराबर अपना हिसाब
चूकता करती है।
हमने उसे जो दिया,
उसने हमें सूद समेत
सब कुछ लौटा दिया।
जाने अंजाने भटक रहे थे
हम मंदिरों मस्जिदों में,
पता चला वो तो यही
बसे है अस्पतालो की दरों में।
हर पल हमारे रक्षक
घूम रहे है रास्तों पर,
बस सबक है इतना,
बने रहे हम अपने घरों पर।
दौड़ती हुई जिंदगी को
थोड़ा रुकना सिखा दिया।
इस महामारी ने तो हमे
जीना सिखा दिया।
- चेतना महाले मिश्रा
पुणे, महाराष्ट्र
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