मायका - by Poonam Gupta


मायका

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सुसराल कितना भी अच्छा हो,

मायका सबको याद आता है।

हमारी उम्र कितनी भी हो,

वहाँ जाने का चाव सबको होता है।

मायके की दहलीज पर जाते ही,

कुछ अलग ही अहसास होता है।

कुछ खट्टी-मीठी यादें होती है,

वो सब वहाँ जाकर याद आता है।

बचपन की बातें याद आती है,

जब-सब मस्ती किया करते थे।

माँ पापा का दुलार याद आता है,

स्कूल के दोस्तों की याद आती है।

अपने साथ कुछ मीठी यादे लेकर,  

वो हँसी-मजाक ठिठोली में,

अपना गुजरा समय याद करती है।

मायके से मीठी यादों को जोड़कर,

प्यार अपनापन लाड दुलार लेकर,

जब हम बेटियाँ मायके से लौटती है।

फिर से नई उमंग उत्साह के साथ,

अपने सुसराल को महकाती है।


- पूनम गुप्ता

भोपाल, मध्य प्रदेश

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