नववर्ष - by Putul Mishra


नववर्ष

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जन-जन का जीवन शुभ हो,

नववर्ष तुम्हारा स्वागत हो।

शुभ हो क्षण-क्षण का मुक्त पवन,

कण-कण मे व्याप्त हो त्याग अमन।

नव सुबह का स्वागत करो हँस कर,

मत याद करो बीते को विसरकर।

समस्यायों का समुचित हल हो,

नववर्ष तुम्हारा स्वागत हो।

इस चमन के फूलों को सीचों,

इस बाग में कभी न आँखें मीचो।

करो त्याग, कर सको जितना इस पर,

तुम नव जीवन के मुशाफिर हो।

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो,

सिर्फ शान्ति के बोल न बोलो,

तुम ह्रदय की शान्ति टटोलो।

हरदिल की संकीर्णता तोड़ो,

ग्रिवा को पीछे न मोड़ो।

सब सम आदर के अधिकारी हो,

नववर्ष तुम्हारा स्वागत हो।


- पुतुल मिश्र

सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल

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