मुकद्दर - by Sushila Devi
मुकद्दर
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मुकद्दर में किसके क्या लिखा होगा अगले पल।
न जाने हमारी किस शख्शियत से मुलाकात हो कल।।
जो समय के साथ बदल जाए वो तो नहीं होते अपने।
न दिल को तड़पा उनके लिए अब जो बने सपने।।
मुकद्दर का लेखा तो ख़ुदा ने रखा अपने हाथ।
सदा रखों तुम सब नेकियों को अपने साथ।।
अच्छे लोगों का इस जिंदगी में मिलना भी मुकद्दर की है बात।
खुशी के सवेरे में बदल देते जो दुखों की रात।।
जिसने खुद से ज्यादा तुम पर भरोसा किया हो।
हर वक्त जिसने तुम्हें दुख में दिलासा दिया हो।।
उसकी आशा बन तुम सदैव उसकी जुबां पर सजे रहना।
सच्चे विश्वास से ही सदा दिल में उसके बसे रहना।।
विश्वास की डोर में कभी गाँठ आने न पाए।
सच्ची प्रीत की आस बस दिल से जाने न पाए।।
हे प्रभु! मेरी एक यही कामना,
सदैव उत्तम व्यक्तित्व वालों की संगत मिलती रहें।
अच्छे गुणों को समाहित कर,मेरी जिंदगी भी सँवरती रहें।।
- सुशीला देवी
करनाल, हरियाणा
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