सुबह सूरज की लाली - by Shailesh Prasad Singh


सुबह सूरज की लाली

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पेड़ों की झुरमुट से झाँकती,

सुबह की सूरज की लाली।

लगता है जैसे आसमान में,

दावानल है अब फैलने वाली।

सूरज की किरणों की लाली,

जगत में फैलाती उजियाली।

चिड़ियों से चहकती वृक्षों की डाली,

बागों में दमकती फूलों की लाली।

भँवरों को करती है मतवाली,

तितलियों को ललचाने वाली।

फूलों की कलियों से बोझिल डाली,

हवाओं के झोकों से होकर मतवाली।

बागों की रौनक को बढ़ाने वाली,

प्रेमी जोड़े को ललचाने वाली।

चारों तरफ छाई है हरियाली,

ओस की बूँदों से चमकने वाली।

मोतियों की तरह दिखने वाली,

सूरज की किरणों से दमकने वाली।

बादलों की ओट से झाँकती,

सूरज की ठंडी-सी उजियाली।

धुप छाँव करने वाली,

आँख मिचौली वाली।

सूर्यदेव संग बादलों की

लुका छिपा का खेल।

मानव जीवन में सुख-दुःख का।

सन्देश को है दर्शाकर ज्ञान देता।

 

- शैलेश प्रसाद सिंह

वैशाली, बिहार

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