पिता - by Tulsiram Rajasthani
पिता
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पिता सृजनहार है,
कुटुम्ब का पालनहार है।
हर छोटे-बड़े की,
खुशियों का संसार है।
पिता के वजूद से ही,
भरा-पूरा परिवार है।
सन्तान के जीवन का,
एक पिता ही तो आधार है।
पिता की अहमियत,
पूछो उस अनाथ से,
जिसके सिर से,
पिता का साया उठ जाता है।
बिना पिता के,
बचपन, यौवन
सबकुछ लुट जाता है।
पिता के जाते ही,
स्वयं भगवान भी रूठ जाता है।
पिता ने अपने खून-पसीने से,
तुम्हारे जीवन को संवारा है।
तुम्हारी हर जीत के लिए,
न जाने कितनी बार वो हारा है।
तुम्हारी जरूरतों की खातिर,
हरबार अपनी इच्छाओं को मारा है।
पिता के कंधों पर,
पूरा परिवार खड़ा है।
एक पिता ही तो है,
जो तुम्हारे लिए हर संकट से लड़ा है।
इसीलिए तो शास्त्रों में,
पिता का स्थान भगवान से भी बड़ा है।
अपने जीवन में,
पिता को कभी दुःख मत पहुँचाना।
लाचारी अवस्था में,
कभी खून के आँसू मत रुलाना।
माँग लेना चाहे प्राण पिता से,
मगर पीठ में कभी छुरा मत घुसाना।
केवल फादर्स-डे मनाने से,
तुम पिता का मान नहीं बढ़ा पाओगे।
पिता को हर परिस्थिति में,
तुम अपने साथ खड़ा पाओगे।
इस संसार में,
वो शख्शियत है पिता,
तुम अपनी हस्ती को मिटाकर भी,
कभी पिता का कर्ज नहीं चुका पाओगे।
- तुलसीराम 'राजस्थानी'
नागौर, राजस्थान
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