प्रतीक्षा - by Aakash Sharma
प्रतीक्षा
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भरत को रही राम की प्रतीक्षा,
वक्त ने ली शबरी की परीक्षा।
सीता की पीड़ा रही भारी,
अहिल्या की राम ने नजर उतारी।
भक्तराज बजरंग बलशाली,
राम के इंतजार में पल-पल है भारी।
केकई है पश्चाताप में,
जल रही है ताप में।
राम के इंतजार में,
पल पल सोचती रहती है।
कभी-कभी खुद से ही कहती है,
राम आएगा तो क्या मुझे माफ करेगा?
मेरे सारे पाप साफ करेगा?
क्या फिर वह मुझसे माँ कहेगा?
राम ने ली है सब की परीक्षा,
सबको है राम की प्रतीक्षा।
- आकाश शर्मा
आगरा, उत्तर प्रदेश
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