राष्ट्र वन्दन - by Sardar Harcharan Singh Sudan


राष्ट्र वन्दन 

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हे ! राष्ट्र भूमि , भारत

तुम्हारा , शत्-शत् वंदन ।।


स्वीकार करो हे ! माता

हमारा हार्दिक अभिनन्दन ।।


ॠषि-मुनियों की , यह तपो भूमि है ।।

गुरु-पैगम्बरों की , यह कर्म भूमि है ।।


देव भूमि यह भारत है

धर्म - अध्यात्म से पूर्ण संस्कृति ।।


कश्मीर से कन्याकुमारी तक छाए

दिव्य छवि और पवित्र प्रकृति ।।


जहाँ ऋतुएं नित धरा सजातीं ,

हिम मुकुट सँवारे व सागर रत्न प्रसारता है ।।


जहाँ शास्त्री , मौलवी, ज्ञानी व पादरी,

अपने धर्म - समाज को प्रचारता है ।।


जहाँ पावन - अलौकिक , अखंड - ज्योति ,

विश्व में प्रकाश फैलाती है ।।


जहाँ चन्दन की सुगन्ध, ममता का संग हो ,

वह पूज्य भूमि भारती है ।।


जिसने वसुधा को, कुटुंब बनाया

ऐसी साधनारत् भूमि भारत है ।।


सत्य - अहिंसा का , सबक पढाया

ऐसी क्रान्तिरत् भूमि भारत है ।।


जो करे निदान , सभी कष्टों का

ऐसी आध्यात्मिक भूमि भारत है ।।


प्राण जाए , पर वचन न जाए

ऐसी धर्म परायण भूमि भारत है ।।


प्रदेश विभिन्न किन्तु देश अभिन्न है

ऐसी विविधता पर हमको है माण ।।


जौहर दिखाए जहाँ वीरांगनाओं ने

वीरों  ने  दिये अपने अतुल्य  प्राण ।।


इस ओर कोई कुदृष्टि न डाल सके

इसे वीरों की रक्त रज प्राप्त है ।।


शत्रु का आगे न , एक पग बढ़े

इस देश का , गौरव व्याप्त है ।।


कभी कोई  न , इसको त्रस्त सके

वीर दिए आहुति , अपने प्राणों की

जय जवान , हर मुख पुकारता है ।।


अब कोई न , इसको ग्रस्त सके

उपज बडी है , अब खेतों की

जय किसान , हर मुख पुकारता है ।।


नवीनतम हुआ, ये पुरातन भारत

नित्य - नवीन आविष्कार लिए

जय विज्ञान , हर मुख पुकारता है ।।


जन - गण - मन का,उच्चारण कर

वीरों ने शत्रु से हाथ, दो-चार किए

जय भारत , हर मुख पुकारता है ।।


यहाँ हर कोई पाता रहा जीवन में

सुख, समृद्धि व शांति अविराम ।।


राष्ट्र भूमि हित निज जीवन अर्पण

मानों सफल यात्रा हो चारों धाम।।


आशीर्वाद अपना, हमको तुम देना

हम हों  सिंचित , हे! मातृ नन्दन।।


हे ! राष्ट्र भूमि , भारत

तुम्हारा , शत्-शत्  वन्दन ।।


- सरदार हरचरन सिंह सूदन 

जम्मू , जम्मू और कश्मीर

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