शहीद की चिट्ठी - by Laxmi Devi "Chetna"
शहीद की चिट्ठी
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सुनो अगर मैं सरहद से ना वापस आऊँ तो,
सुनो अगर मैं शहीद हो जाऊँ तो,
सुनो अगर मैं तिरंगा में लिपटा आऊँ तो,
सुनो अगर मैं वीरगति पाऊँ तो,
ना आँसू बहाना,
ना विलाप करना तुम।
सर को ऊँचा उठाकर,
माँ भारती को सलाम करना तुम।
ना चढाना तुम मेरे,
तस्वीर पर चन्दन की माला।
लगा देना ऊपर तुम,
मेरा तिरंगा प्यारा।
कोई पुछे तुमसे तुम्हारा परिचय,
कह देना तूम उस शहीद की विधवा हो,
जिसने जीत का झंडा फहराया हैं।
अब सोया है चिर निद्रा में,
माँ भारती के गोद में समाया है।
कभी ना भूलाना जवानो की कुर्बानी,
बच्चों को भी सुनाना, वीरों की कहानी।
- लक्ष्मी देवी "चेतना"
तिनसुकिया, असम
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