बिटिया - by Sharda Prasad Tiwari "Paras"


बिटिया

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इक बाप का सहारा, इक अरमान है बिटिया,

इक माँ की खातिर, सारा ये जहान है बिटिया।

मौका पड़ने पर बन लक्ष्मी, जो तलवार उठाले,

क्यों समझ के रक्खा है, एक सामान है बिटिया।।


ना समझो इसे कोमल, ना नाजों से तुम पालो,

ये फौलाद बन के निकले, उस साँचे में ढालो।

 जरूरत नहीं इसे किसी, मददगार की रक्षा को,

इक दिन समझ लोगे,खुद बलवान है बिटिया।।

इक बाप का सहारा.....


जिसने नौ माह तक तुझे, अपनी कोख में ढोया,

कितना दर्द झेला था उसने, जब पैदा तू होया।

अब अबला कह कह के, उसका अपमान न कर, 

कयामत से दर्द सहने की,इक पहचान है बिटिया।।

इक बाप का सहारा.....


गौरा बनी है कभी तो, कभी काली भीे बनी है,

श्रृष्टि को गर रची तो, यह रखवाली भी बनी है।

 सावित्री बनकर जो कभी, यमराज को हरा दी,

सीता के समान सदा ही रही, धैर्यवान है बिटिया।।

इक बाप का सहारा.....


तो मत मारो इसे कोख में, दुनिया में आने दो,

इसको भी सुंदर कल के, सपनों को सजाने दो।

"पारस" इसे भी हक है, इस दुनिया में जीने का,

ईश्वर का दिया हुआ इक, वरदान है बिटिया।।

इक बाप का सहारा.....


- शारदा प्रसाद तिवारी "पारस"

कटनी, मध्य प्रदेश

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