चाहत है यही मेरी - by Gaurav Karn
चाहत है यही मेरी
-
चाहत है यही मेरी की, व्यवहार बना रहे,
ऐसे ही सब का मुझ पे, आशीर्वाद बना रहे।
मेरी जिन्दगी बड़ों के, कदमों में सदा रहे,
छोटों का मेरे साथ, ऐसे ही प्यार बना रहे।।
खुशनसीब हूँ की माँ-बाप में भगवान मुझे मिले,
कष्टों में तप के निखरा हूँ वो पहचान मुझे मिले।
सुख-दुख को साथ बाँटे वो परिवार मुझे मिले,
खुद मेहनत से आगे बढ़ा वो खानदान मुझे मिले।।
अपनों से जो मिला है, वो एहसान मुझ पे है,
रिश्तों से मैं बंधा हूँ, ये एहसास मुझ में है।
माँ-बाप का आशीर्वाद तो, सदा ही सर पे है,
मैं आज जो भी हूँ ये सब, उनकी ही देन है।।
मेरी जिन्दगी किसी के, अगर काम आ सके,
दे दूँ लहू का कतरा भी, अगर जान आ सके।
कर काम इस तरह के, सब तेरा नाम ले सके,
कुछ अच्छे तेरे कर्मों का, सब पैगाम दे सके।।
जीवन दिया भगवान ने, तो बिंदास हो के जी,
ग़म तो तेरा ही दोस्त है, उसे साथ ले के जी।
खुशी तो एक मेहमा है, उस से तू मिल के जी,
हर हार और जीत से तू, अब आगे बढ़ के जी।।
- गौरव कर्ण
गुरुग्राम, हरियाणा
No comments