पापा मेरे असली हीरो हैं - by Gaurav Karn


पापा मेरे असली हीरो हैं

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पापा मेरे असली हीरो हैं,

उनके आगे सब जीरो है।

हर डर को मार भगाते थे,

खुद हार मुझे जिताते थे।

मेरे लिए कभी घोड़ा बने,

कंधे पे उठा वो झुला बने।


हमको कभी कोई कमी न हो,

आँखों में हमारे नमी न हो।

खुद तपते रहे काम करते रहे,

हमें छाँव दिया खुद जलते रहे।

माँगा हमने वो सब दिया,

हमे पता नहीं सब कैसे किया।


जब थक के घर में आते हैं,

हमें देख के खुश हो जाते हैं।

हर ग़म को छुपा ले जाते हैं,

खुद रोते हैं, हमे हँसाते हैं।

आँसू उनका हमें दिखता नहीं,

चेहरे पे शिकन पर छिपता नहीं।


कभी हार के जब बैठ जाते हैं,

हमें सोच के फिर उठ जाते हैं।

कभी थकते नहीं, कभी झुकते नहीं,

बस भागते रहते हैं, वो रुकते नहीं।

परेशान हमें वो देख सकते नहीं,

खुद खप जाए हमें छोड़ सकते नहीं।


वो शिक्षक हैं, संस्कार भी हैं, 

हमारे लिए घर-संसार भी हैं।

दुश्मन के लिए वो काल भी हैं,

हमारे लिए वो ढाल भी हैं।

मम्मी अगर घर की नीव हैं,

पापा उस घर की छतरी हैं।


- गौरव कर्ण

गुरुग्राम, हरियाणा

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