माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा - by Chandan Keshri


माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा

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इस देश ने है सब कुछ दिया, मैं इसके काम आऊँगा।

एक नन्हा बालक कहता है, माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा।


अपने देश के हर ओर, दुश्मन है यहाँ भरे हुए।

अपने देश की रक्षा होगी, हम ना किसी से डरे हुए।

तू चिंता मत करना माँ! मैं तनिक नहीं घबराऊँगा।

तेरे आशीर्वाद से ही, शत्रुओं को धुल चटाऊँगा।

शत्रु का करके सामना, मैं विजय अवश्य ही पाऊँगा।

सीमाप्रहरी बनना है मुझे, माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा।


माँ! मैं तेरा बेटा हुँ, तू मेरी जीवनदाता है।

औ' रहते हम जिस भूमि पर, वह मेरी भारतमाता है।

भारतमाता के प्रति, मैं अपना फर्ज़ निभाऊँगा।

देशहित में ही सदा, मैं कार्य करता जाऊँगा।

देखना माँ तुम एक दिन, मैं देश की शान बढ़ाऊँगा।

मुझमें भी साहस भरा, माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा।


फौज से छुट्टी लेकर जब, मैं तो घर को आऊँगा।

सब कुछ छोड़ कर मैं तो, तेरे गले से लग जाऊँगा।

उस क्षण-सा नहीं कोई, मेरे लिए तो क्षण होगा।

तुझसे दूर जाने को, मेरा भी कभी ना मन होगा।

पर देश के लिए माँ तो, अपना सर्वश्य लगाऊँगा।

तेरा बहादुर बेटा हुँ, माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा।


अगर शहीद हो जाऊँ तो, माँ! तुम रोना नहीं।

वह तो गर्वित क्षण होगा, माँ! धैर्य तुम खोना नहीं।

मुझे तो बनना है फौजी, कर्तव्य मुझे निभाना है।

देश के लिए जीना मुझे, देश के लिए मन जाना है।

जान जाए परवाह नहीं, सीमा पर लड़ता जाऊँगा।

हौंसला है मुझमें भी, माँ! मैं भी फौज में जाऊँगा।


- चन्दन केशरी
झाझा, जमुई (बिहार)

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