प्रीत के धागे - by Pratibha Tripathi


प्रीत के धागे

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अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

थाली आज सजाई है।

प्रीत के धागे लेकर,

 बहना रानी आई है॥


भैया के माथे पे टीका,

बहना ने आज सजाया है।

लेकर मंगल दीप आरती,

प्रभु से विनती लगाई है॥ 


रक्षाबंधन के पावन दिन पर,

बहना आवाज लगाती है।

आ जा भैया पास मेरे तुम,

तेरी कलाई सजाती हूँ॥ 


भैया मेरा पल-पल चमके,

ऐसा दीप जलाऊँगी।

मईया के घर ऑंगन में,

 चंदा तारें लाऊँगी॥


अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

 थाली आज सजाऊँगी।

भैया दे दो वचन मुझे,

प्रीत की रीत निभाओगे॥


अक्षत कुमकुम दीप सुमन से,

थाली आज सजाऊँगी.....


- प्रतिभा त्रिपाठी

भिलाई, छत्तीसगढ़

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