हालात पे हँसना आया - by Gaurav Karn


हालात पे हँसना आया

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हमको अपनी इस हालात पे हँसना आया,

अपने किस्मत की औकात पे हँसना आया।

जिसे सोचा था कि वो साथ रहेगा हरदम,

उसके बिछड़ने के एहसास पे हँसना आया।।


ग़म तू मत कर किसी के आने और जाने का,

जो तेरा था नहीं उसके अब बिछड़ जाने का।

दिल को तो समझाया बहुत है ये मगर,

मुझको उसके जाने के ग़म पे हँसना आया।।


मैंने सोचा न था ऐसा दिन भी कभी आएगा,

मेरा हर दाव मुझ पर ही उलट जाएगा।

अब जो होना है वो तो हो के रहेगा ही,

मुझको हर दाव के उलटने पे हँसना आया।।


क्यूँ कोई काम बनते बनते बिगड़ जाता है,

क्यूँ कोई मंज़िल हमसे यूँ दूर हो जाता है।

ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब चाहिए मुझे,

मुझको ऐसे ही कुछ सवालात पे हँसना आया।।


हे भगवान! तू हमसे इतना ख़फ़ा क्यूँ है,

हमसे क्या पाप हुआ उसकी ये सजा क्यूँ है?

तेरे दिए दर्द को मैं हँसते हुए सह जाता मगर, 

मुझको हर दर्द के सहने पे हँसना आया।।


तू इम्तिहां मत ले कि बर्दास्त न कर पाऊँ मैं,

मुझे इतना भी मत दवा कि फट न जाऊँ मैं।

सहते-सहते इसकी आदत हो तो गई है मुझे,

मुझको बर्दास्त करने की क्षमता पे हँसना आया।।


अब दिन-रात मेरे चाहने वाले घर पे आते हैं,

अब दिन-रात उसके बारे में ही सोचे जाते हैं।

अब भगवान ही बचाए ऐसे चाहने वालों से,

मुझको ऐसे ही चाहने वालों पे हँसना आया।।


मुझको तोड़ने की बहुत जिद है समय तुझको,

यक़ी है बाजुओं पे के तू झुका ना पाएगा मुझको।

अब किस्मत पे रोना बंद कर दिया है "गौरव",

मुझको समय के ऐसे जिद पे हँसना आया।।

 

- गौरव कर्ण

गुरुग्राम, हरियाणा

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