जय जननी जय भारतमाता - by Vijay Purohit


जय जननी जय भारतमाता

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जय जननी जय भारतमाता,

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।

सैनिक हूँ मैं भारतमाता तेरा,

तुझमें माँ अपनी जान समाऊँ।।


तन सौंपा है, मन भी है सौपा,

हृदय मे माँ तेरी सूरत बसाऊँ।

विरह वेदना दिल में देश हित,

कैसे मेरे मन को धीर बढ़ाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


राग द्वैष मद, लोभ-मोह का मैं,

त्याग करूँ सब देश हित खातिर।

सब-कुछ तुझे माँ करूँ समर्पित,

मेरी जां समर्पित भी कर जाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


नहीं ध्यान मेरा किसी ओर में,

भारत माँ मैं तेरी भक्ति पाऊँ।

दूर रहूँ नहीं मैं एक पल भर भी,

माँ विजयदीप से ज्योति जलाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


कण-कण में है माँ चंदन तेरे,

माटी में चंदन सी खुशबू पाऊँ।

दैह तिरोहित करके भी अपना,

जनम-जनम माँ तुझको पाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


छवि तेरी माँ मेरे मन भीतर,

जण गण मन मैं गीत सुनाऊँ।

देश के आन-बान की खातिर,

न्योछावर प्राण मेरा कर जाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


धन्य हो तुझे हे भाग्य-विधाता,

हर जनम मेरा मैं भारत मे पाऊँ।

भारत माँ तेरी सेवा में हरदम,

सैनिक बन सर्व समर्पित हो जाऊँ।।

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


देश हित दुश्मन से मैं लड़ते,

भारत की आन बान शान बचाऊँ।

दुश्मन जो ग़र आँख दिखावे,

"विजय"शेर बन दहाड़ लगाऊँ।।

जय जननी जय भारतमाता,

खुद को समर्पित तुझमें पाऊँ।।


- विजय पुरोहित

रामगढ़-शेखावाटी, राजस्थान

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