तिरंगे को दिल में बसाए रखना - by Vijay Purohit
तिरंगे को दिल में बसाए रखना
-
जिस तिरंगे की हिफ़ाजत हमने की है,
उस तिरंगे को दिल में बसाए रखना।
देशवासियों अब हम तो सफर करते है,
हिन्द को अब तुम ही बचाए रखना।।
पीठ न दिखाई दुश्मन को कभी हमने,
झेली है हमने सीने पे अपने गोलियाँ।
धूप-बरसात में खड़े रहे हम डटकर,
दुश्मन का बखूब हमने सामना किया।
सूखे नहीं इन गोलियों के घाव हमारे,
इन सब घावों के निशां बचाए रखना।।
जिस तिरंगे की हिफ़ाजत हमने की है,
उस तिरंगे को दिल में बसाए रखना।।
अब हम तो हो चले कुर्बान वतन पर,
तुम पर कभी कोई आँच आने नहीं दी।,
मर मिटे हम देश की माटी के वास्ते,
एक इंच भी जमीं दुश्मन को नहीं दी।
पीछे जो खदेड़ा है इक-इक को हमने,
उस हिम्मत व हौंसले को बनाए रखना।
जिस तिरंगे की हिफ़ाजत हमने की है,
उस तिरंगे को दिल में बसाए रखना।।
देश की खातिर हम मर मिट जाएँ,
सबसे पहला हमारा यहीं इक धर्म है।
वतन के लिए ये जवानी लिख जाएँ,
यही सबसे पहला हमारा निज कर्म है।
विजय दिलाई है जो लड़कर के हमने,
'विजय' विजयदिवस याद बनाए रखना।
जिस तिरंगे की हिफ़ाजत हमने की है,
उस तिरंगे को दिल में बसाए रखना।।
- विजय पुरोहित
रामगढ़-शेखावाटी, राजस्थान
No comments