माँ का आँचल - by Vijay Purohit
माँ का आँचल
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हर शिशु का मनोभाव,चाहता है माँ का आँचल।
मातृत्व का अहसास,दिलाता है माँ का आँचल।।
अपने बच्चे को देख के,माँ का प्रेम उमड़ पड़ता है।
करुणा व दया का सुन्दर भाव जिगर भरता है।।
माँ नदी वात्सल्य की, जिसका कोई छोर नहीं है।
माँ पतंग प्रेम भाव-सी, जिसमें कोई डोर नहीं है।।
हृदय समां लेता है दुख-दर्द,इक मातृत्व आँचल।
मातृत्व का अहसास,दिलाता है माँ का आँचल।।
सुखद आभास,पाता है, शिशु माँ के आँचल में।
जन्नत सा अहसास,मिलता है उसे माँ आँचल में।।
माँ त्याग,तपस्या और ममता की मूरत होती है।
माँ है संवेदना और परमात्मा की सूरत होती है।।
अद्भुत स्नेह भाव से भरा,है हर माँ का आँचल।
मातृत्व का अहसास,दिलाता है माँ का आँचल।।
माँ के आँचल की छाँव ही देवभूमि-सी लगती है।
काशी,मथुरा,स्वर्ग की भूमि भी फ़ीकी लगती है।।
दुख शिशु का सह ना सकती,लोरी उसे सुनाती है।
ममतामयी माँ की आँखें,बच्चे को गले लगाती है।।
"विजय"माँ के दुलार से सो जाता है नन्हा पागल।
मातृत्व का अहसास दिलाता है माँ का आँचल।।
- विजय पुरोहित
रामगढ़-शेखावाटी, राजस्थान
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