कुछ लोग हैं ना - by Dr. Shaheda
कुछ लोग हैं ना
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तू अपनी ज़िन्दगी अपने उसूलों पे जिये जा,
यहाँ बेवजह बात करने वाले कुछ लोग हैं ना ।
अपनी मंज़िल पाने के लिये बेख़ौफ़ चला जा,
तेरी राह में काँटे बिछाने वाले कुछ लोग हैं ना ।
मुड़कर न देख पीछे तू कभी, आगे बढ़ता जा,
तेरे हक़ में बद्दुआ करने वाले, कुछ लोग है ना ।
तू अपनी परवाज़ बुलन्द कर और ऊँचा जा,
गिराने की कोशिश करने वाले, कुछ लोग हैं ना ।
शमा जलाते रहो रास्ते के अंधेरे दूर होते रहें,
अपनी जाँ निसार करने वाले, कुछ लोग हैं ना ।
जहाँ जाना हर जगह बस प्यार बाँटते जाना,
आपस में नफ़रत फैलाने वाले, कुछ लोग हैं ना ।
एक दूसरे से प्रेम भाव रहे जियो जैसे छःतीन,
दिलों के बीच दूरी बढ़ाने वाले, कुछ लोग हैं ना ।
मरहम लगाओ ज़ख्म पर,बस ज़ख्म देखकर,
ज़ात पात रंग रूप देखने वाले, कुछ लोग हैं ना ।
सबके लहु का रंग मैंने बस लाल देखा शाहिद ,
लाल रंग को बेरंग करने वाले, कुछ लोग हैं ना |
- डॉ० शाहिदा
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
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