कुदरत का करिश्मा - by Saraswati Mallick
कुदरत का करिश्मा
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जुगनुओं का मेला ,
तारों का मजमा
नजारा है ये दिलकश
बेहद खुशनुमा ।
दरख्तों पे डाला
है रोशनी ने डेरा ,
फलक ने पहना
हीरों का गहना ।
उजाले में कहाँ
कोई दम है इतना ,
अंधेरी काली रात
का है ये करिश्मा ।
बनाने वाले ने बनाई
बहुत सोचकर ये दुनियाँ ,
हरेक शै की होती हैं
अपनी खास खूबियाँ ।
बख्शी है अपनी नेमत
हर एक शै को उसने ,
नवाजा हर किसी को
बेहतरीन हुनर से उसने ।
रौशन करता है धरती को
अपनी चाँदनी से चंद्रमा ,
सजाता है तारों की बारात
अंधेरी रात में आसमां ।
ये जुगनुओं का मेला
वो तारों का मजमा ,
बहुत खूबसूरत है
कुदरत का करिश्मा ।
- सरस्वती मल्लिक
मधुबनी, बिहार
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