क्यों है - by Dr. Shaheda
क्यों है
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दिल ने मुझे इतना सताया क्यों है,
पहलू में मेरे रहके रुलाया क्यों है ।
मुद्दत हुई है मुझको नींद आए हुए,
आज नींद आई तो जगाया क्यों है ।
आँसुओं से तर हो गया था चेहरा,
ख्वाब में आके मुझको हँसाया क्यों है ।
पहलू में था जो बरसों से हमारे,
बाद मुलाक़ात के पराया क्यों है ।
छिप गया बदली में चाँद रात में,
किसी को देखकर शरमाया क्यों है ।
चाँदनी ने ओढ़ ली है काली चादर,
सितारों से आस्माँ जगमगाया क्यों है ।
काँटों की चुभन बरक़रार है अभी,
गुल मगर आज मुस्कुराया क्यों है ।
कश्ती मेरी साहिल के क़रीब है "शाहिद",
फिर हवाओं ने शोर मचाया क्यों है ।
- डॉ० शाहिदा
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
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