प्रकृति का उपहार - by Priyanka Alaknandani
प्रकृति का उपहार
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प्रकृति का उपहार बारंबार, हर बार।
कर जाता अचंभा हर बार।
कभी बाग, कभी बहार।
कहीं बाढ़, कहीं सुखाड़।।
प्रकृति का उपहार.....
प्रकृति होती माँ के जैसी।
गलती पे थप्पड़ लगाती।
कभी प्यार से गोद बैठाती।।
प्रकृति का उपहार.....
प्यारी-सी नदियाँ, सुन्दर से पहाड़।
मिट्टी ओर उसमें उपजते फसल अपार।
प्राण वायु देकर हमारा जीवन किया निहाल।।
प्रकृति का उपहार.....
जब भी करेंगें बेकदरी प्रकृति के उपहारों का हम।
पाएँगें करोना जैसी महामारी हम।
मान करो, सम्मान करो,
प्रकृति का संरक्षण करो।
मत उनका भक्षण करो।
सब मिलकर प्रकृति का गुणगान करो।।
प्रकृति का उपहार......
- प्रियंका अलकनंदनी
गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
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